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Monday, 12 October 2020

ओशो की दस आज्ञा

 


ओशो की दस आज्ञाओं को विस्तार से समझने के लिए कोष्ठक में लिखे प्रवचन पढ़िए या सुनिए-

1. किसी की आज्ञा कभी मत मानो जब तक कि वह स्वयं की ही आज्ञा न हो।
(सहज समाधि भली-19)
2. जीवन के अतिरिक्त और कोई परमात्मा नहीं है।
(सत्य का दर्शन-4)
3. सत्य स्वयं में है, इसलिए उसे और कहीं मत खोजना।
(नये मनुष्य का धर्म-6)
4. प्रेम प्रार्थना है।
(प्रेम है द्वार प्रभु का-7, अथातो भक्ति जिज्ञासा-1)
5. शून्य होना सत्य का द्वार है; शून्यता ही साधन है, साध्य है, सिद्धि है।
(ध्यान सूत्र-7)
6. जीवन है, अभी और यहीं।
(महागीता-2 दूसरा प्रश्न, महावीर वाणी भाग-2 प्रवचन-6)
7. जीओ--जागे हुए।
(क्या मनुष्य एक यंत्र है?-3, तृषा गई एक बूंद से-7)
8. तैरो मत, बहो।
(प्रीतम छबि नैनन बसी-14)
9. मरो प्रतिक्षण, ताकि प्रतिपल नए हो सको।
(अनहद में विश्राम-4)
10. खोजो मत, जो है--है, रुको और देखो।
(साधना पथ-4)