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Tuesday, 20 October 2015

शक्तिदायी विचार (स्वामी विवेकानंद)


उठो, जागो और सोओ मत। सारे अभाव और दु:ख नष्ट करने की शक्ति तुम्हीं में है, इस बात पर विश्वास करने ही से वह शक्ति जाग उठेगी। ... मनुष्य तब अपनी उस आत्मा की महिमा में प्रतिष्ठित हो जाता है, जो असीम अनन्त है, अविनाशी है, जिसे कोई शस्त्र छेद नहीं सकता, आग जला नहीं सकती, पानी गीला नहीं कर सकता, वायु सुखा नहीं सकती, – जो असीम है, जन्म-मृत्यु रहित है तथा जिसकी महत्ता के सामने सूर्यचन्द्रादि, यहाँ तक कि सारा ब्रह्माण्ड सिन्धु में बिन्दु तुल्य प्रतीत होता है – जिसकी महत्ता के सामने देश और काल का भी अस्तित्व लुप्त हो जाता है।दिन-रात श्रवण करो कि तुम्हीं वह आत्मा हो।
दिन-रात यही भाव अपने में व्याप्त किये रहो, यहाँ तक कि वह तुम्हारे रक्त के प्रत्येक बूँद में और तुम्हारी नस नस में समा जाय। सम्पूर्ण शरीर को इसी एक आदर्श के भाव से पूर्ण कर दो – ‘मैं अज, अविनाशी, आनन्दमय, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान नित्य ज्योतिर्मय आत्मा हूँ’ – दिन-रात यही चिन्तन करते रहो, जब तक कि यह भाव तुम्हारे जीवन का अविच्छेद्य अगं नहीं बन जाता। इसीका ध्यान करते रहो – और इसीसे तुम कर्म करने में समर्थ हो सकोगे। ... तब इस विचार-शक्ति के प्रभाव से तुम्हारे सम्पूर्ण कर्म बृहत्, परिवर्तित और देवभावापन्न हो जायेंगे। अगर ‘जड़’ शक्तिशाली है, तो ‘विचार’ सर्वशक्तिमान है। इस विचार से अपने जीवन को प्रेरित कर डालो, स्वयं को अपनी तेजस्विता, सर्वशक्तिमत्ता और गरिमा के भाव से पूर्णत: भर लो। तूम वीर्यवान, सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञ हो। तुम्हारे भीतर सम्पूर्ण ज्ञान, सारी शक्तियाँ, पूर्ण पवित्रता और स्वाधीनता के भाव विद्यमान हैं।
Swami Vivekananda

( Posted from "Voice of Vivekananda" Android App )

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